हजरत मोहम्मद साहब की जीवनी अल्लाह के रसूल पैग़म्बर

हजरत मोहम्मद साहब की जीवनी अल्लाह के रसूल पैग़म्बर

हजरत मोहम्मद साहब की जीवनी

हजरत मुहम्मद जी व उनके 1 लाख 80 हजार अनुयायी शाकाहारी थे। हजरत मुहम्मद जी ने मुस्लमानों को यह आदेश दिया था कि कभी भी “खून खराबे व ब्याज के करीब ना फटकना”(प्रमाण- पुस्तक जीवनी हजरत मुहम्मद, सल्लाहु अलैहि वसल्लम, पृष्ठ 307) फिर क्यों मुस्लमान धर्म में निर्दोष जानवरों का क़त्ल व मांस भक्षण किया जाता है ?यह अल्लाह के विधान के विरुद्ध है। हजरत मुहम्मद जी ने भी पाप कर्म दंड झेला पुस्तक- जीवनी हजरत मुहम्मद (सल्लाहु अलैहि वसल्लम के पृष्ठ 46, 51-52, 64, 307-315) में प्रमाण है कि-हजरत मुहम्मद जी ने बचपन में यतीमी का दुःख देखा। उनके तीनों पुत्रों की मृत्यु हो गई तथा स्वयं हजरत मुहम्मद जी की भी 63 वर्ष की उम्र में असहाय बीमारी से तड़फ तड़फ कर मृत्यु हुई।पाप कर्म दंड तो सिर्फ अल्लाह कबीर की सच्ची इबादत करने से ही समाप्त हो सकतें है। सच्ची इबादत की जानकारी ना होने की वजह से हजरत मुहम्मद जी ने जीवन भर बहुत पीड़ा सही पुस्तक – जीवनी हजरत मुहम्मद (सल्लाहु अलैहि वसल्लम पृष्ठ 64, 307 से 315) के अनुसार हज़रत मुहम्मद जी के तीनों पुत्र उनकी आँखों के सामने मृत्यु को प्राप्त हुए। उन्होंने 63 वर्ष की आयु में सख्त बीमार होने के चलते असहनीय पीड़ा में प्राण त्याग दिए। सच्ची इबादत केवल बाख़बर संत रामपाल जी महाराज जी ही बताते हैं जिससे पाप रूपी कांटे भी निकल जाते हैं व मोक्ष प्राप्ति होती है। कुरान शरीफ में मांस खाने का संकेत अल्लाह का नहीं है हजरत मोहम्मद साहब की जीवनी
वास्तव में हजरत मुहम्मद जी को एक जिबराईल नामक फरिश्ते ने गला घोंट-घोंट कर जबरदस्ती डरा धमका कर कुरान शरीफ का ज्ञान लिखवाया था, अपने ही बनाये जीवों को मार कर खाने का आदेश कभी अल्लाह का नहीं हो सकता। (प्रमाण- पुस्तक जीवनी हजरत मुहम्मद, सल्लाहु अलैहि वसल्लम, पृष्ठ 307-315) हजरत मुहम्मद तथा उनके एक लाख अस्सी हजार अनुयाईयों ने कभी मांस-शराब, तम्बाखू सेवन नहीं किया और न ही ऐसा करने का आदेश दिया।
लेकिन वर्तमान में शराब, तम्बाखू का प्रयोग बहुत जोर शोर से हो रहा है और मुसलमान समाज में मांस तो आम बात हो गई। हजरत मुहम्मद जी को जिबराईल नामक फ़रिश्ते ने गला घोंट घोंट कर जबरदस्ती डरा धमका कर कुरान शरीफ का ज्ञान तथा नमाज आदि बताई। फिर भी हजरत मुहम्मद जी की आंखों के सामने उनके तीनों पुत्र मृत्यु को प्राप्त हुए।
कुरान के अनुसार भक्ति करते हुए भी हज़रत मुहम्मद जी के जीवन में कहर ही कहर रहा। हजरत मुहम्मद जी का रुझान जन्म से लेकर मृत्यु तक अध्यात्मिक रहा। बहुत से नियम बनाए। कभी मांस खाना तो दूर छुआ तक नहीं। ब्याज का पैसा नहीं लेते थे। हुक्का और तंबाकू को हाथ तक नहीं लगाते थे ऐसे थे मोहम्मद पीर। हज़रत मुहम्मद जी का जीवन
हजरत मुहम्मद जी 63 वर्ष की आयु में दो दिन असहाय पीड़ा के कारण दर्द से बेहाल होकर मृत्यु को प्राप्त हुए। जिस पिता के सामने तीनों पुत्र मृत्यु को प्राप्त हो जाऐं, उस पिता को आजीवन सुख नहीं होता।
बाख़बर संत रामपाल जी महाराज हज़रत मुहम्मद जी की जीवनी
फरिश्ते जिबराईल ने नबी मुहम्मद जी का सीना चाक किया उसमें शक्ति उड़ेल दी और फिर सील दिया तथा एक खच्चर जैसे जानवर पर बैठा कर ऊपर ले गया। वहाँ नबियों की जमात आई, उनमें हजरत मुसा जी, ईसा जी और इब्राहीम जी आदि भी थे। जिनको हजरत मुहम्मद जी ने नमाज पढाई। हजरत मोहम्मद साहब की जीवनी
फिर सातवें आसमान पर गए। पर्दे के पीछे से आवाज आई की प्रति दिन पचास नमाज किया करें। वहाँ से पचास नमाजों से कम करवाकर केवल पाँच नमाज ही अल्लाह से प्राप्त करके नबी मुहम्मद वापिस आ गए।
बाख़बर के बिना इबादत करना व्यर्थ है
हजरत मुहम्मद जी को संतान रूप में खदीजा जी से तीन पुत्र तथा चार बेटियाँ प्राप्त हुई।
तीनों पुत्र कासिम, तय्यब, ताहिर हजरत मुहम्मद जी की आँखों के सामने मृत्यु को प्राप्त हुए। केवल चार लड़कियां शेष रहीं। हजरत मोहम्मद साहब की जीवनी

अधिक जानकारी के लिए पढ़िए पवित्र पुस्तक ज्ञान गंगा उर्दू हिन्दी शुक्रिया हजरत मोहम्मद साहब की जीवनी

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