बलिहारी जावू मारा सतगुरू ने lyrics

बलिहारी जावू मारा सतगुरू ने lyrics 

(धरमी दासजी की वाणी )

बलिहारी जावू मारा सतगुरू ने किया भर्म सब दूर।
किया भर्म सब दूर मारा, किया भर्म सब दूर ॥ टेर ॥

प्याला पाया प्रेम का, घोल संजीवन मोय ।
चढ़ी खूमारी प्रेम रो, मन हो गया चकनाचूर ॥ 1 ॥

बलिहारी जावू मारा सतगुरू ने lyrics

कुमता घटी सुमता बढ़ी, उर आनन्द भयो भरपूर ।
राग द्वैष जगत री मेटी, अब मन भयो मजूर ॥ 2 ॥

विमल प्रकाश लखयो, बिना सखी धन चोर ।
वरसे अनहद नाचे मनवो, बाजे श्या अनहद तूर ॥ 3 ॥

बलिहारी जावू मारा सतगुरू ने lyrics

शब्द सुणया गुरूदेवजी रा, जममुख पड़ गयी धूड़ ।
धरमीदास को आये मिला है सतगुरू सायब कबीर ॥ 4 ॥ 

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(1) पेला पेला देवरे गजानंद सिमरो (2) मैं थाने सिमरु गजानंद देवा (3) सन्तो पूजो पांचोहि देवा (4) गणपत देव रे मनाता (5) मनावो साधो गवरी रो पुत्र गणेश (6) सन्तो मैं बाबा बहुरंगी (7) सन्तो अविगत लिखीयो ना जाई (8) अब मेरी सुरता भजन में लागी (9) अब हम गुरु गम आतम चीन्हा (10) काया ने सिणगार कोयलिया (11) मत कर भोली आत्मा (12) जोगीड़ा ने जादू कीन्हो रे (13) मुसाफिर मत ना भटके रे (14) गिगन में जाए खड़ी प्रश्न उत्तर वाणी (15) जिस मालिक ने सृष्टि रचाई (16) बर्तन जोये वस्तु वोरिए (17) गुरु देव कहे सुन चेला (18) संतो ज्ञान करो निर्मोही (19) मोक्स का पंथ है न्यारा (20) गुरुजी बिना सुता ने कूण जगावे (21) केसर रल गई गारा में (22) पार ब्रह्म का पार नहीं पाया (23) आयो आयो लाभ जन्म शुभ पायो (24) इण विध हालो गुरुमुखी (25) आज रे आनंद मारे सतगुरु आया पावणा (26) मारे घरे आजा संत मिजवान (27) गुरु समान दाता जग में है नहीं (28) बलिहारी गुरुदेव आपने बलिहारी (29) गुरु बिन घोर अंधेरा (30) भोली सी दुनिया सतगरु बिन कैसे सरिया

 

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