ऐसा जन रामजी ने भावे भजन lyrics

ऐसा जन रामजी ने भावे भजन lyrics

( सन्त श्री सुन्दर दास जी की वाणी )

ऐसा जन रामजी ने भावे ।
कनक कामणी परे हरे, नहीं आप बन्धावे ॥ टेर ॥

के तो मुनि मुख होय रहिया, कै हरि गुण गावे ।
भर्म कथा संसार री सब, दूर बहावे ॥ 1 ॥

सबसे रहे र्निवैरता, कोउ न दुःखावे रे ।
शितल वाणी बोलकर, रस अमृत पावे रे ॥ 2 ॥

पाँचो इन्द्रिय मारकर, मन माय मिलावे रे ।
काम क्रोध, मद लोभ री, खोज गमावे रे ॥ 3 ॥

चौथे पद छिन्न कर, माय समावे रे ।
सुन्दर ऐसे सन्त को, काल नहीं आवे रे ॥ 4 ॥

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(1) पेला पेला देवरे गजानंद सिमरो (2) मैं थाने सिमरु गजानंद देवा (3) सन्तो पूजो पांचोहि देवा (4) गणपत देव रे मनाता (5) मनावो साधो गवरी रो पुत्र गणेश (6) सन्तो मैं बाबा बहुरंगी (7) सन्तो अविगत लिखीयो ना जाई (8) अब मेरी सुरता भजन में लागी (9) अब हम गुरु गम आतम चीन्हा (10) काया ने सिणगार कोयलिया (11) मत कर भोली आत्मा (12) जोगीड़ा ने जादू कीन्हो रे (13) मुसाफिर मत ना भटके रे (14) गिगन में जाए खड़ी प्रश्न उत्तर वाणी (15) जिस मालिक ने सृष्टि रचाई (16) बर्तन जोये वस्तु वोरिए (17) गुरु देव कहे सुन चेला (18) संतो ज्ञान करो निर्मोही (19) मोक्स का पंथ है न्यारा (20) गुरुजी बिना सुता ने कूण जगावे (21) केसर रल गई गारा में (22) पार ब्रह्म का पार नहीं पाया (23) आयो आयो लाभ जन्म शुभ पायो (24) इण विध हालो गुरुमुखी (25) आज रे आनंद मारे सतगुरु आया पावणा (26) मारे घरे आजा संत मिजवान (27) गुरु समान दाता जग में है नहीं (28) बलिहारी गुरुदेव आपने बलिहारी (29) गुरु बिन घोर अंधेरा (30) भोली सी दुनिया सतगरु बिन कैसे सरिया

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