शिव रात्रि पर विशेष
श्रीमद्देवी भागवत पुराण पृष्ठ 123 पर भगवान विष्णु द्वारा की गई माता दुर्गा की स्तुति के वर्णन से साबित होता है कि भगवान ब्रह्मा जी तथा विष्णु जी समेत भगवान शंकर भी जन्म-मृत्यु में हैं।
🔱 तीन देव की जो करते भक्ति। उनकी कबहु न होवै मुक्ति।।
परमेश्वर कबीर जी ने कहा है कि जो साधक भूलवश तीनों देवताओं रजगुण ब्रह्मा, सतगुण विष्णु, तमगुण शिव की भक्ति करते हैं, उनकी कभी मुक्ति नहीं हो सकती। शिव रात्रि पर विशेष
🔱पवित्र गीता जी के अनुसार व्रत नहीं करना चाहिए। गीता अध्याय 16 श्लोक 23 में लिखा है कि जो व्यक्ति शास्त्र विधि को छोड़ कर मनमानी पूजा करते हैं उनको मोक्ष प्राप्त नहीं होता है इसलिए महाशिवरात्रि के व्रत करने से कोई लाभ नहीं है।
🔱ॐ नमः शिवाय व महामृत्युंजय मंत्र के जाप से मुक्ति संभव नहीं। गीता अध्याय 17 श्लोक 23 में कहा है कि पूर्ण परमात्मा व मोक्ष की प्राप्ति का केवल तीन मंत्र ओ३म् (ॐ) तत् सत् के जाप का ही निर्देश है। (जो कि सांकेतिक हैं) जिसे तत्वदर्शी संत ही बता सकते हैं।
वह तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी ही हैं। शिव रात्रि पर विशेष
🔱 श्री देवी पुराण (सचित्र मोटा टाइप, केवल हिंदी, गीता प्रैस गोरखपुर से प्रकाशित) के तीसरे स्कंद में पृष्ठ 123 पर श्री विष्णु जी स्वयं कह रहे हैं कि हमारा (त्रिगुण दवताओं का) तो जन्म मरण होता है। हम अविनाशी नहीं हैं।
🔱परमेश्वर कबीर जी ने समझाया है कि तत्वज्ञानहीन मूर्ति पूजक अपनी साधना को श्रेष्ठ बताने के लिए जनता को भ्रमित करने के लिए विविध प्रकार के रंग-बिरंगे पत्थर के शिवलिंग रखकर अपनी रोजी-रोटी चलाते हैं। जो कि शास्त्र विरुद्ध साधना है।
🔱 भगवान शिव शंकर (महादेव) को संहार करने का विभाग काल ने दिया क्योंकि इनके पिता निरंजन को एक लाख मानव शरीर धारी जीव प्रतिदिन खाने पड़ते हैं। शिव रात्रि पर विशेष
🔱माया काली नागिनी, अपने जाये खात।
कुण्डली में छोड़ै नहीं, सौ बातों की बात।।
स्वयं ब्रह्मा, विष्णु, महेश, आदि माया शेराँवाली भी निरंजन की कुण्डली में है। ये अवतार धर कर आते हैं और जन्म-मृत्यु का चक्कर काटते रहते हैं।
🔱 शिव जी अविनाशी व पूर्ण परमात्मा नहीं हैं।
कबीर परमात्मा ही अविनाशी हैं जो सतलोक के मालिक हैं। ब्रह्मा-विष्णु-शिव जी नाशवान परमात्मा हैं। महाप्रलय में ये सब तथा इनके लोक समाप्त हो जाएंगे।
🔱सामान्य जीव से लेकर ब्रह्मा जी, विष्णु जी तथा शिव जी तक भी सुखी नहीं हैं। क्योंकि इनकी भी मृत्यु होती है। (श्रीमद देवी भागवत पृष्ठ 123) और जब तक जन्म – मरण है तब तक सुख नहीं हो सकता। शिव रात्रि पर विशेष
🔱शिव जी अंतर्यामी नहीं हैं।
क्योंकि वे भस्मागिरी की दुर्भावना नहीं जान पाए थे।
शिव जी अजरो अमर नहीं हैं क्योंकि वे भस्मासुर के हाथ में भस्मकंडा देखकर भयभीत हो कर जीवन रक्षा के लिए भागे थे।
🔱 ॐ नमः शिवाय पंचाक्षरी मंत्र नहीं है – श्री शिव पुराण ।
ॐ नमः शिवाय से मुक्ति संभव नही। शिव जी से लाभ पाने का मंत्र और विधि केवल तत्वदर्शी संत ही बता सकते हैं।
वह तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी ही हैं। शिव रात्रि पर विशेष
🔱 भगवान शिव तथा महाशिव में अंतर स्पष्ट रूप से देवी भागवत पुराण के पृष्ठ 114 से 118 पर अंकित है।
महाशिव इन तीनों भगवानों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) से भिन्न है जिसे हम महाकाल भी कहते हैं। जिसे संत भाषा में ब्रह्म, काल या ज्योति निरंजन भी कहा जाता है। महाशिव 21 ब्रह्मांड का मालिक है जिसकी पत्नी माता दुर्गा है। शिव रात्रि पर विशेष