मनावो साधो गवरी रो पुत्र गणेश भजन lyrics

भजन मनावो साधो गवरी रो पुत्र गणेश भजन lyrics मनावो साधो गवरी रो पुत्र गणेश मनावो साधो अमिया लाल गुणेश।।टेर।। (1).सोहम शब्द सहि कर मानो ध्यान धरो जी हमेश। (2).मुल…

गणपत देव रे मनाता भजन lyrics ।

भजन गणपत देव रे मनाता भजन lyrics साधु भाई गणपत देव रे मनाता।। गणपति सुमरीया सदा सुख पावै दुख दरिद्र नशाता।।टेर।। (1) तुम गणनायक सन्त सहायक बुद्धि विधायक त्राता।दुष्ट विदारक…

मैं थाने सिमरु गजानंद देवा lyrics

मैं थाने सिमरु गजानंद देवा lyrics   मैं थाने सिमरू गुजानंद देवा म्हारे वचना रा पूरण वाला जिओ सरस्वती मैया शारदा ने सीमरू मारे हिवडे करोनी अजवाला जिओ निंद्रा निवारो…

तीर्थ तथा धाम क्या हैं?

तीर्थ तथा धाम क्या हैं? प्रश्न:- तीर्थों, धामों पर श्रद्धा से दर्शनार्थ तथा पूजा करने से हिन्दू गुरुजन बहुत पुण्य बताते हैं। यह साधना लाभदायक है या नहीं? कृप्या शास्त्रों…

श्राद्ध की पौराणिक कथा । मार्कण्डेय पुराण द्वारा प्रमाणित

श्राद्ध की पौराणिक कथा   ‘‘मार्कण्डेय पुराण में पितरों की दुर्गति का प्रमाण’’जिन्दा महात्मा अर्थात् परमेश्वर ने धर्मदास जी से कहा कि ‘‘हे धर्मदास जी! आपने बताया कि आप भूत…

श्राद्ध भ्रम खण्डन भाग 1 । सत्य कथा शास्त्र प्रमाणित

श्राद्ध भ्रम खण्डन भाग 1सत्य कथा क्या ऐसा भी हो सकता है? ‘‘लेखक (रामपाल दास) द्वारामेरे पूज्य गुरुदेव स्वामी रामदेवानन्द जी गाँव-बड़ा पैंतावास, तहसील-चरखी दादरी, जिला-भिवानी (प्रान्त-हरियाणा) के निवासी थे…

श्राद्ध भ्रम खण्डन भाग 2 । सत्य कथा शास्त्र प्रमाणित

श्राद्ध भ्रम खण्डन भाग 2 ‘‘प्रभु कबीर जी द्वारा श्राद्ध भ्रम खण्डन’’ की इतनी सुंदर पौराणिक कथा 📜एक समय काशी नगर (बनारस) में गंगा दरिया के घाट पर कुछ पंडित…

पीपल और तुलसी की पूजा कैसे करें

पीपल और तुलसी की पूजा कैसे करें ‘‘पीपल, जांडी के वृक्षों तथा तुलसी के पौधे की पूजा पर टिप्पणी’’ 📜वाणी सँख्या 4:- पीपल पूजै, जाँडी पूजे, सिर तुलसाँ के होइयाँ।दूध-पूत…

परमात्मा के साथ धोखा । एक हास्य प्रसंग कहानी

परमात्मा के साथ धोखा  एक हास्य प्रसंग सहित कबीर जी कहते हैं कि:- अहरण की चोरी करें, करें सूई का दान।स्वर्ग जान की आस में, कह आया नहीं विमान।। शब्दार्थ:-…

सोलह शुक्रवार व्रत कथा

सोलह शुक्रवार व्रत कथा ‘‘सोलह शुक्रवार के व्रत करना’’वाणी सँख्या 6:-पति शराबी घर पर नित ही, करत बहुत लड़ईयाँ।पत्नी षोडष शुक्र व्रत करत है, देहि नित तुड़ईयाँ।।6।। शब्दार्थ:- परमेश्वर कबीर…