Kaun Hain Kal Bhagwan आत्माएँ काल के जाल में कैसे फँसी? विशेष :- जब ब्रह्म (ज्योति निरंजन) तप कर रहा था हम सभी आत्माएँ, जो आज ज्योति निरंजन के इक्कीस…
Shaunak Rishi Ki Katha महर्षि शौनक ये नैमिषारण्यके अठासी हजार ऊर्ध्वरेता ब्रह्मवादी ऋषियोंमें प्रधान ऋषि थे। भृगुवंशमें उत्पन्न होनेसे भार्गव और शुनकके पुत्र होनेके कारण इनका नाम शौनक पड़ा। समस्त…
Shukdev Rishi Ki Katha श्री शुकदेव जी आत्मारामाश्च मुनयो निर्ग्रन्था अप्युरुक्रमे।कुर्वन्त्यहैतुकीं भक्तिमित्थम्भूतगुणो हरिः॥(श्रीमद्भा० १।७। १०) 'जो आत्माराम, आप्तकाम, मायाके समस्त बन्धनोंसे मुक्त मुनिगण हैं, वे भी भगवान में निष्काम भक्ति…
Vedvyas Ji Ki Katha महर्षि वेदव्यास जी स वै पुंसां परो धर्मो यतो भक्तिरधोक्षजे।अहैतुक्यप्रतिहता ययाऽऽत्मा सम्प्रसीदति॥(श्रीमद्भा० १।२।६) 'इन्द्रियातीत परमपुरुष भगवान्में वह निष्काम एवं निर्बाध भक्ति हो, जिसके द्वारा वे आत्मस्वरूप…
Mahrishi Maitray Ki Katha महर्षि मैत्रेय महर्षि मैत्रेय पुराणवक्ता ऋषि हैं। वे 'मित्र' के पुत्र होनेके कारण मैत्रेय कहाये। श्रीमद्भागवतमें इनके सम्बन्धमें इतना ही मिलता है कि ये महर्षि पराशरके…
Bhakt Padmanabh Ki Katha भक्त पद्मनाभ प्राचीन कालकी बात है। आजकल जहाँ श्रीबालाजीका मन्दिर है, वहाँसे थोड़ी दूर एक चक्रपुष्करिणी नामका तीर्थ था। उसके तटपर श्रीवत्सगोत्रीय पद्मनाभ नामके ब्राह्मण निवास…
Bhakt Ramanuj Ki Katha भक्त रामानुज दक्षिणमें रामानुज नामसे प्रसिद्ध एक जितेन्द्रिय ब्राह्मण थे। भगवान् विष्णुके चरणोंमें उनका अटूट अनुराग था। उन्होंने क्रमशः ब्रह्मचर्य और गृहस्थ आश्रमको पार करके वानप्रस्थमें…
Bhakt Bhadramati Ki Katha भक्त भद्रमती प्राचीनकालमें भद्रमति नामसे प्रसिद्ध एक श्रेष्ठ ब्राह्मण हो गये हैं। वे बड़े विद्वान् और नि:स्पृह थे। उन्होंने एक समय यह उद्गार प्रकट किया था…
Ramkrishna Muni Ki Katha भक्त रामकृष्ण मुनि यह मनुष्य-जीवन बड़ा दुर्लभ है। इसकी प्राप्ति संसारका सुख भोगनेके लिये नहीं, भगवान को प्राप्त करके संसार-बन्धनसे मुक्त हो जानेके लिये ही हुई…