jadbharat ki katha महात्मा जड़भरत जी प्राचीन कालमें भरत नामके एक महान् प्रतापी एवं भगवद्भक्त राजा हो गये हैं, जिनके नामसे यह देश 'भारतवर्ष' कहलाता है। अन्त समयमें उनकी एक…
भक्त मंकणक की कथा शिवभक्त मंकणक पुण्यसलिला सरस्वती नदीके किनारे एक परम तपस्वी मंकणक नामके ब्राह्मण रहते थे। एक दिनकी बात है, अपने नित्य-नैमित्तिक कर्मके लिये कुश लाते समय कुशकी…
शिवभक्त उपमन्यु की कथा शिवभक्त उपमन्यु भक्तराज उपमन्यु परम शिवभक्त, वेदतत्त्वके ज्ञाता महर्षि व्याघ्रपादके बड़े पुत्र थे। एक दिन उपमन्युने मातासे दूध माँगा। घरमें दूध था नहीं। माताने चावलोंका आटा…
Shivbhakt Mahakal Ki Katha शिवभक्त महाकाल प्राचीनकालमें वाराणसी नगरीमें माण्टि नामके एक महायशस्वी ब्राह्मण रहते थे। वे शिवजीके बड़े भक्त थे और सदा शिवमन्त्रका जप किया करते थे। प्रारब्धवश उनके…
hShivbhakt Vaishvanar Ki Katha शिवभक्त वैश्वानर प्राचीन कालमें पुण्यसलिला नर्मदाके पावन तटपर नर्मपुर नामक एक अति रमणीय छोटा-सा गाँव था। उसमें विश्वानर नामक एक पुण्यात्मा ब्रह्मचारी रहत थे। उनके मुखपर…
'जिसके ललाटपर (भाग्यमें) मृत्यु-ये दो अक्षर (निश्चित मरण) लिखे हैं, वह समस्त क्लेश देनेवाले पाप कैसे करता है। कुरुक्षेत्रमें एक ब्राह्मण पुण्डरीक और एक क्षत्रिय अम्बरीष रहते थे। दोनोंमें बड़ी…
Mahrishi Mudgal Ki Katha महर्षि मुद्गल मुद्गल नामक ऋषि कुरुक्षेत्रमें रहते थे। ये बड़े धर्मात्मा, जितेन्द्रिय, भगवद्भक्त एवं सत्यवक्ता थे। किसीकी भी निन्दा नहीं करते थे। बड़े कर्मनिष्ठ एवं महात्मा…
Mahrishi Sharbhang Ki Katha महर्षि शरभङ्ग तपोभूमि दण्डकारण्य-क्षेत्रमें अनेकानेक ऊर्ध्वरेता ब्रह्मवादी ऋषियोंने घोर तपस्याएँ की हैं। कठिन योगाभ्यास एवं प्राणायामादि द्वारा संसारके समस्त पदार्थोंसे आसक्ति, ममता, स्पृहा एवं कामनाका समूल…
Sutikshna Muni Ki Katha सुतीक्ष्ण मुनि राम सदा सेवक रुचि राखी। बेद पुरान संत सब साखी॥ महर्षि अगस्त्यके शिष्य सुतीक्ष्णजी जब विद्याध्ययन कर चुके, तब गुरुदेवसे उन्होंने दक्षिणाके लिये प्रार्थना…