Atharved Me Srusti Rachna Sampuran Anuvak Shlok Arth Sahit

Atharved Me Srusti Rachna पवित्र अथर्ववेद में सृष्टि रचना का प्रमाण अथर्ववेद काण्ड नं. 4 अनुवाक नं. 1 मंत्र नं. 1:- ब्रह्म जज्ञानं प्रथमं पुरस्त्ताद् वि सीमतः सुरुचो वेन आवः।स…

Rigved Me Srusti Rachna Sampuran Mandal Sukt Mantra Arth Sahit In Hindi

Rigved Me Srusti Rachna पवित्र ऋग्वेद में सृष्टी रचना का प्रमाण  ऋग्वेद मण्डल 10 सुक्त 90 मंत्र 1 सहस्‍त्रशीर्षा पुरूषः सहाक्षः सहापात्।स भूमिं विश्वतों वृत्वात्यतिष्ठद्दशाङ्गुलम्।।1।। सहशिर्षा-पुरूषः-सहाक्षः-सहपात्-स-भूमिम्-विश्वतः-वृत्वा-अत्यातिष्ठत्-दशंगुलम्। अनुवाद:- (पुरूषः) विराट रूप…

Kabirsagar Me Srusti Rachana Sampuran Jankari Praman Sahit

Kabirsagar Me Srusti Rachana कबीर सागर में सृष्टि रचना कविर्देव (कबीर परमेश्वर) ने सूक्ष्म वेद अर्थात् कबिर्बाणी में अपने द्वारा रची सृष्टि का ज्ञान स्वयं ही बताया है जो निम्नलिखित…

Kaun Hain Kal Bhagwan Jyoti Nirajan Bhagwan Kon Hai Must Read In Hindi

Kaun Hain Kal Bhagwan आत्माएँ काल के जाल में कैसे फँसी? विशेष :- जब ब्रह्म (ज्योति निरंजन) तप कर रहा था हम सभी आत्माएँ, जो आज ज्योति निरंजन के इक्कीस…

Chanakya Niti Ki Baten Chanakiye Ke Marmik Vichar

Chanakya Niti Ki Baten चाणक्य के 15 अमर वाक्य 1) दुनिया की सबसे बड़ी ताकत पुरुष का विवेक और महिला की सुन्दरता है। 2) हर मित्रता के पीछे कोई स्वार्थ…

Shaunak Rishi Ki Katha Bhaktmal Ki Pauranik Kathaen Dvara Rachit

Shaunak Rishi Ki Katha महर्षि शौनक ये नैमिषारण्यके अठासी हजार ऊर्ध्वरेता ब्रह्मवादी ऋषियोंमें प्रधान ऋषि थे। भृगुवंशमें उत्पन्न होनेसे भार्गव और शुनकके पुत्र होनेके कारण इनका नाम शौनक पड़ा। समस्त…

Shukdev Rishi Ki Katha Bhaktmal Dvara Rachit Poranik Kathaen

Shukdev Rishi Ki Katha श्री शुकदेव जी आत्मारामाश्च मुनयो निर्ग्रन्था अप्युरुक्रमे।कुर्वन्त्यहैतुकीं भक्तिमित्थम्भूतगुणो हरिः॥(श्रीमद्भा० १।७। १०) 'जो आत्माराम, आप्तकाम, मायाके समस्त बन्धनोंसे मुक्त मुनिगण हैं, वे भी भगवान में निष्काम भक्ति…

Vedvyas Ji Ki Katha i Bhaktmal Dvara Rachit Pauranik Katha वेदव्यास जी की जन्म कथा

Vedvyas Ji Ki Katha महर्षि वेदव्यास जी स वै पुंसां परो धर्मो यतो भक्तिरधोक्षजे।अहैतुक्यप्रतिहता ययाऽऽत्मा सम्प्रसीदति॥(श्रीमद्भा० १।२।६) 'इन्द्रियातीत परमपुरुष भगवान्में वह निष्काम एवं निर्बाध भक्ति हो, जिसके द्वारा वे आत्मस्वरूप…