बंशी कविराय की कुंडलियां । गुरु गीता रामनाम एवं सतसंग महिमा

गुरु गीता - प्रारम्भ बंशी कविराय की कुंडलियां गनपति सुरपति गजवदन आदिदेव इकदन्त ।जाके सुमिरण मात्रसे सुधरे काज अनन्त ॥सुधरे काज़ अनन्त बुद्धि विद्या के दाता।खुले ज्ञानभण्डार और इच्छित फल…

शुक्राचार्य जी की कथा । shukracharya ji ki katha

शुक्राचार्य जी की कथा शुक्राचार्य जी का संक्षिप्त परिचय महर्षि शुक्राचार्य जी की कथा भगवान ब्रह्मा जी के तीसरे मानसिक पुत्र भृगु हुए। इन भृगु के कवि हुए और कवि…

सगरामदास जी की कुंडलियां । सम्पूर्ण कुण्डलिया अर्थ सहित

सगरामदास जी की कुंडलियां कहे दास सगराम मनै यों अचरज आवै।मिनख कियो महाराज भले थूं काईं चावै।।कांई चावै है वले यों तो मनै बताय।राम नाम कहे रात दिन तेरा जन्म…

मंगलगिरी जी की कुंडलियां छंद टॉप 20 भक्ति रचनाएं

मंगलगिरी जी की कुंडलियां आइए दोस्तों जानते हैं मंगलगिरी महाराज की कुंडलियां इन्होंने अपने भक्ति भाव को कुंडलिक सरल भाषा में लिपिबद्ध किया है जो की बहुत ही सराहनीय है…

गिरधर कविराय की कुंडलिया || अर्थ सहित काव्य रचनाएँ

गिरधर कविराय की कुंडलियां [lwptoc numeration="none" numerationSuffix="none" title="गिरधर की कुंडलियाँ" smoothScroll="1"] दौलत पाय न कीजिए, सपनेहु अभिमान दौलत पाय न कीजिए, सपनेहु अभिमान। चंचल जल दिन चारिको, ठाउं न रहत…