गिरधर कविराय की कुंडलिया || अर्थ सहित काव्य रचनाएँ
गिरधर कविराय की कुंडलियां [lwptoc numeration="none" numerationSuffix="none" title="गिरधर की कुंडलियाँ" smoothScroll="1"] दौलत पाय न कीजिए, सपनेहु अभिमान दौलत पाय न कीजिए, सपनेहु अभिमान। चंचल जल दिन चारिको, ठाउं न रहत…