Shukdev Rishi Ki Katha Bhaktmal Dvara Rachit Poranik Kathaen

Shukdev Rishi Ki Katha श्री शुकदेव जी आत्मारामाश्च मुनयो निर्ग्रन्था अप्युरुक्रमे।कुर्वन्त्यहैतुकीं भक्तिमित्थम्भूतगुणो हरिः॥(श्रीमद्भा० १।७। १०) 'जो आत्माराम, आप्तकाम, मायाके समस्त बन्धनोंसे मुक्त मुनिगण हैं, वे भी भगवान में निष्काम भक्ति…