Posted inHindu तुलसीदास जी के दोहे तुलसीदास जी के दोहे मो सम दीन न दीन हित, तुम समान रघुवीर । अस विचारि रघुवंशमनि हरहु विषम भवपीर ॥१॥ भव भुजङ्ग नकुल डसत ज्ञान हरि हर लेत। चित्रकूट… Posted by Variyamath November 4, 2021