Who Created The Universe In Hindi Must Read

Who Created The Universe

  Who Created The Universe

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आइए पढ़ते हैं संपूर्ण सृष्टि रचना शास्त्रानुसार प्रमाणित परिचय : who created the universe

कौन है संपूर्ण सृष्टि का मालिक क्या नाम है ?

पूर्ण ब्रह्म :- इस सृष्टि रचना में सतपुरुष-सतलोक का स्वामी (प्रभु), अलख पुरुष-अलख लोक का स्वामी, अगम पुरुष-अगम लोक का स्वामी तथा अनामी पुरुष-अनामी अकह लोक का स्वामी (प्रभु) तो एक ही पूर्ण ब्रह्म है, जो वास्तव में अविनाशी प्रभु है जो भिन्न-2 रूप धारण करके अपने चारों लोकों में रहता है। जिसके अन्तर्गत असंख्य ब्रह्माण्ड आते हैं। सर्व प्रथम केवल एक स्थान ‘अनामी लोक‘ था। पूर्ण परमात्मा उस अनामी लोक में अकेला रहता था। उस परमात्मा का वास्तविक नाम कविर्देव अर्थात् कबीर परमेश्वर है। सभी आत्माऐं उस पूर्ण धनी के शरीर में समाई हुई थी। कबीर परमेश्वर ने ही शब्द से पराशक्ति की उत्पत्ति की पूर्ण धनी कविर्देव ने सर्व रचना स्वयं की। अपनी शब्द शक्ति से एक राजेश्वरी (राष्ट्री) शक्ति उत्पन्न की, जिससे सर्व ब्रह्माण्डों को स्थापित किया।

परमात्मा और मनुष्य में क्या अंतर है ?

इसी को पराशक्ति परानन्दनी भी कहते हैं। पूर्ण प्रभु अनामी, अगम, तथा अलख लोक रचने के बाद सतलोक में प्रकट हुआ तथा सतलोक का भी अधिपति यही है। इसी का नाम अकालमूर्ति – शब्द स्वरूपी राम – पूर्ण ब्रह्म – परम अक्षर ब्रह्म आदि हैं। कबीर प्रभु का मानव सदृश शरीर तेजोमय है। कबीर परमेश्वर (कविर्देव) की रोशनी में अंतर भिन्न-2 लोकों में होता जाता है। ठीक इसी प्रकार पूर्ण परमात्मा कविर्देव (कबीर परमेश्वर) ने अनामी लोक के बाद नीचे के तीन और लोकों (अगमलोक, अलख लोक, सतलोक) की रचना शब्द(वचन) से की। कविर्देव (कबीर प्रभु) ने सतपुरुष रूप में प्रकट होकर सतलोक में विराजमान होकर प्रथम सतलोक में अन्य रचना की। एक शब्द (वचन) से सोलह द्वीपों की रचना की। पूर्ण ब्रह्म कबीर परमात्मा ने सर्व आत्माओं को अपने ही अन्दर से अपनी वचन शक्ति से अपने मानव शरीर सदृश उत्पन्न किया। प्रत्येक हंस आत्मा का परमात्मा जैसा ही शरीर रचा जिसका तेज 16 (सोलह) सूर्यों जैसा मानव सदृश ही है। परंतु परमेश्वर के शरीर के एक रोम कूप का प्रकाश करोड़ों सूर्यों से भी ज्यादा है। who created the universe

परमात्मा ने प्रथम किस को उत्पन्न किया ?

सतलोक में शब्द से 16 पुत्रों की उत्पत्ति कबीर परमात्मा ने सतलोक में 16 द्वीप रचने के बाद सोलह शब्दों से सोलह पुत्रों की उत्पत्ति की। एक मानसरोवर की रचना की जिसमें अमृत भरा। सतलोक में कबीर परमेश्वर के 16 पुत्रों में से एक पुत्र अचिंत को जब परमात्मा ने अन्य सृष्टि रचने को कहा तब उसने अक्षर पुरुष की उत्पत्ति की जो मानसरोवर में सो गया। जिसको जगाने के लिए परमात्मा ने काल की उत्पत्ति की। अचिंत सृष्टि करने में असमर्थ रहा। सतपुरुष (कविर्देव) ने सतलोक में आकाशवाणी की कि अक्षर पुरुष और काल (क्षर पुरुष) दोनों अचिंत के द्वीप में रहो। आज्ञा पाकर अक्षर पुरुष तथा क्षर पुरुष (कैल) दोनों अचिंत के द्वीप में रहने लगे। फिर पूर्ण धनी कविर्देव ने सर्व रचना स्वयं की। परब्रह्म :- यह केवल सात शंख ब्रह्माण्ड का स्वामी (प्रभु) है। यह अक्षर पुरुष भी कहलाता है। परन्तु यह तथा इसके ब्रह्माण्ड भी वास्तव में अविनाशी नहीं है। ब्रह्म :- यह केवल इक्कीस ब्रह्माण्ड का स्वामी (प्रभु) है। इसे क्षर पुरुष, ज्योति निरंजन, काल आदि उपमा से जाना जाता है। यह तथा इसके सर्व ब्रह्माण्ड नाशवान हैं। 

श्री मद्भागवत गीता जी में भी तीन पुरुषों का वर्णन आता है क्षर पुरुष अक्षर पुरूष और परम् अक्षर पुरूष गीता जी अध्याय 15 श्लोक 16,17 में प्रमाण है।

आत्माऐं काल के जाल में कैसे फँसी? 

ब्रह्म (ज्योति निरंजन) तप कर रहा था हम सभी आत्माऐं, जो आज ज्योति निरंजन के इक्कीस ब्रह्माण्डों में रहते हैं इसकी साधना पर आसक्त हो गए तथा अन्तरात्मा से इसे चाहने लगे। अपने सुखदाई प्रभु सत्य पुरूष से विमुख हो गए। जिस कारण से पतिव्रता पद से गिर गए। पूर्ण प्रभु के बार-बार सावधान करने पर भी हमारी आसक्ति क्षर पुरुष से नहीं हटी। who created the universe

इच्छा रूपी खेलन आया ताते सुख सागर नही पाया।

बहुत समय उपरान्त क्षर पुरुष (ज्योति निरंजन) ने सोचा कि हम तीनों (अचिन्त – अक्षर पुरुष – क्षर पुरुष) एक द्वीप में रह रहे हैं तथा अन्य एक-एक द्वीप में रह रहे हैं। मैं भी साधना करके अलग द्वीप प्राप्त करूँगा। उसने ऐसा विचार करके एक पैर पर खड़ा होकर सत्तर (70) युग तक तप किया। हक्का कबीर (सत् कबीर) ने ज्योति निरंजन को उसके 70 युग के तप के बदले में 21 (इक्कीस) ब्रह्माण्ड प्रदान कर दिए। ज्योति निरंजन ने 70 युग फिर से तप करके पूर्ण परमात्मा कविर्देव (कबीर प्रभु) से रचना सामग्री की याचना की। सतपुरुष ने उसे तीन गुण तथा पाँच तत्त्व प्रदान कर दिए, जिससे ब्रह्म (ज्योति निरंजन) ने अपने ब्रह्माण्डों में कुछ रचना की। ज्योति निरंजन ने अपने 21 ब्रह्मण्डों के लिए जीव प्राप्त करने के लिए 64 युग तक तप किया। सतपुरुष कबीर परमेश्वर ने कहा कि ब्रह्म मैं मेरी आत्माओं को किसी भी जप-तप साधना के फल रूप में नहीं दे सकता। यदि कोई स्वेच्छा से जाना चाहे तो वह जा सकता है। ज्योति निंरजन फिर सभी हंस आत्माओं के पास आया कि मैंने पिता जी से 21 ब्रह्माण्ड प्राप्त किए हैं। वहाँ नाना रमणीय स्थल बनाए हैं। हम सभी हंसों ने जो आज 21 ब्रह्माण्डों में परेशान हैं, कहा कि हम तैयार हैं ! पूर्ण ब्रह्म ने सतलोक में सर्व प्रथम काल के साथ उसके 21 ब्रह्मांड में जाने की स्वीकृति देने वाले हंस को लड़की का रूप दिया परन्तु स्त्री इन्द्री नहीं रची तथा सर्व आत्माओं को (जिन्होंने ज्योति निरंजन (ब्रह्म) के साथ जाने की सहमति दी थी) उस लड़की के शरीर में प्रवेश कर दिया तथा उसका नाम आष्ट्रा (आदि माया/ प्रकृति देवी/ दुर्गा) पड़ा तथा सत्य पुरूष ने कहा कि पुत्रा मैंने तेरे को शब्द शक्ति प्रदान कर दी है जितने जीव ब्रह्म कहे आप उत्पन्न कर देना। काल ने सतलोक में प्रकृति से बलात्कार करने की ठानी। उसी समय दुर्गा ने अपनी इज्जत रक्षा के लिए सुक्ष्म रूप बनाया तथा ज्योति निरंजन के खुले मुख के द्वारा पेट में प्रवेश करके पूर्णब्रह्म कविर् देव से अपनी रक्षा के लिए याचना की। who created the universe

कबीर साहेब जी द्वारा शक्ती का काल के पेट से उद्धार 

उसी समय कविर्देव अपने पुत्र योगजीत का रूप बनाकर वहाँ प्रकट हुए तथा कन्या को ब्रह्म के उदर से बाहर निकाला तथा कहा कि ज्योति निरंजन आज से तेरा नाम ‘काल‘ होगा। तेरे जन्म-मृत्यु होते रहेंगे और तू एक लाख मानव शरीर धारी प्राणियों को प्रतिदिन खाया करेगा व सवा लाख उत्पन्न किया करेगा। आप दोनों को इक्कीस ब्रह्माण्ड सहित निष्कासित किया जाता है। इतना कहते ही इक्कीस ब्रह्माण्ड विमान की तरह चल पड़े। ब्रह्म तथा ब्रह्मा में भेद – एक ब्रह्माण्ड में बने सर्वोपरि स्थान पर ब्रह्म (क्षर पुरुष) स्वयं तीन गुप्त स्थानों की रचना करके ब्रह्मा, विष्णु तथा शिव रूप में रहता है तथा अपनी पत्नी प्रकृति (दुर्गा) के सहयोग से तीन पुत्रों की उत्पत्ति करता है। उनके नाम भी ब्रह्मा, विष्णु तथा शिव ही रखता है। जो ब्रह्म का पुत्र ब्रह्मा है वह एक ब्रह्माण्ड में केवल तीन लोकों (पृथ्वी लोक, स्वर्ग लोक तथा पाताल लोक) में एक रजोगुण विभाग का मंत्री (स्वामी) है। इसे त्रिलोकीय ब्रह्मा कहा है तथा ब्रह्म जो ब्रह्मलोक में ब्रह्मा रूप में रहता है उसे महाब्रह्मा व ब्रह्मलोकीय ब्रह्मा कहा है। इसी ब्रह्म (काल) को सदाशिव, महाशिव, महाविष्णु भी कहा है। ब्रह्मा विष्णु महेश है तीन लोक प्रधान।
दुर्गाजी इनकी माता पिता काल भगवान्।। who created the universe

उप संहार

आशा करता हूं दोस्तों यह सृष्टि रचना आपको पसंद आई होगी ऐसी और भी बहुत सारी जानकारी पढ़ने के लिए आप हमारी वेबसाइट विजिट कर सकते हैं अथवा नीचे दी गई समरी पर क्लिक करके भी पढ़ सकते हैं। धन्यवाद !

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